
Rakesh yadav
20 फरवरी, 2026 को उत्तर प्रदेश के बांदा ज़िले की एक विशेष पॉक्सो अदालत ने करीब एक दशक तक 33 नाबालिग़ों से यौन हिंसा करने के आरोप में राम भवन और उनकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सज़ा सुनाई.
अदालत ने इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ़ द रेयर’ श्रेणी का अपराध माना.
साथ ही कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को सर्वाइवर्स के परिजनों को 10-10 लाख रुपए मुआवज़ा देने का निर्देश भी दिया.
इस मामले की जाँच सीबीआई ने की थी. सीबीआई ने वर्ष 2020 में इस मामले में मुक़दमा दर्ज किया था
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सीबीआई को पहली बार कैसे मिली जानकारी?
सीबीआई को 31 अक्तूबर 2020 को एक गुप्त सूचना मिली थी कि चित्रकूट और आसपास के ज़िलों में कुछ नाबालिग बच्चों का संगठित रूप से यौन शोषण किया जा रहा है.
सूचना देने वाले व्यक्ति ने एक पेनड्राइव भी उपलब्ध कराई, जिसमें 34 वीडियो और 679 तस्वीरें थीं.
जाँच एजेंसी ने इन वीडियो और तस्वीरों में राम भवन और अन्य अज्ञात व्यक्तियों को नाबालिग़ों के साथ यौन हिंसा करते हुए पाया. सीबीआई ने दिल्ली में 31 अक्तूबर 2020 को रामभवन के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 377, 14 पॉक्सो एक्ट और 67बी आईटी एक्ट में मुक़दमा दर्ज किया और दो नवंबर 2020 को चित्रकूट ज़िले में आकर अभियुक्त राम भवन की जाँच शुरू की.

सीबीआई की जाँच में यह भी सामने आया कि सिंचाई निर्माण खंड कर्वी चित्रकूट में जूनियर इंजीनियर के पद पर तैनात राम भवन का कार्यक्षेत्र चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर और महोबा ज़िले तक फैला हुआ था.
जाँच एजेंसी के मुताबिक़ राम भवन नाबालिग़ बच्चों को पढ़ाने, कंप्यूटर सिखाने, मोबाइल देने या अन्य लालच देकर घर बुलाता था.
वहां उनके साथ यौन अपराध किया जाता था और उसका वीडियो बनाकर सामग्री को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म्स डार्क वेब, स्काइप और मेल के ज़रिए भारत के अलावा विदेशों में भी शेयर किया जाता था.
सीबीआई के पूर्व पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बीबीसी को बताया, “हमें 31 अक्तूबर 2020 को पहली बार गुप्त सूत्रों से जानकारी मिली. हमने दो नवंबर 2020 को राम भवन के घर पर छापा मारा, बिना अरेस्ट के एग्जामिनेशन किया और फिर अरेस्ट किया. हमने इस केस में अरेस्ट करने में देरी नहीं की.”

Video क्यों बनाता था ?
सीबीआई की ओर से दावा किया गया है कि राम भवन नाबालिग़ बच्चों का यौन शोषण करता था और उन बच्चों का फ़ोटो और वीडियो बनाकर ईमेल या अन्य साइट्स के माध्यम से देश-विदेशों में भेजता था.
पूर्व सीबीआई अधिकारी और इस मामले के इंचार्ज रहे अमित कुमार नाबालिग़ बच्चों के अश्लील फ़ोटो और वीडियो की बिक्री से इनकार करते हैं.
अमित कुमार ने बीबीसी हिन्दी को बताया, “इस मामले में यह बात मीडिया में चल रही है कि नाबालिग़ बच्चों का वीडियो राम भवन डार्क साइट के माध्यम से बेच रहा था, लेकिन वीडियो बेचा नहीं जा रहा था. ट्रायल में कहीं यह बात आई नहीं. उसने वीडियो शौक के लिए बनाया और उसे शेयर किया जा रहा था.”
अमित कुमार ने यह जानकारी भी दी, “नाबालिग़ बच्चों का अश्लील वीडियो सिर्फ़ राम भवन नहीं भेज रहा था, बल्कि बाहर से इसे भी वीडियो भेजा जा रहा था. यह टू वे प्रोसेस था. वो नाबालिग़ बच्चों का वीडियो यूरोप के लगभग सभी देश, बांग्लादेश, श्रीलंका और देश के अंदर दूसरे राज्यों में भी शेयर कर रहा था.”
सीबीआई को छापे के दौरान घर से सेक्स टॉयज और पोर्नोग्राफिक सामग्री भी मिली.
दोषी दंपती कौन है?

यौन शोषण का दोषी 45 साल का राम भवन एक ग़रीब परिवार में पैदा हुआ था.
नौकरी पाने से पहले राम भवन छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर अपना ख़र्च चलाता था. साल 2009 में सिंचाई निर्माण खंड में राम भवन की नौकरी लग गई. राम भवन मई 2009 से नवंबर 2020 में गिरफ़्तार होने तक नौकरी में रहा.
राम भवन की पत्नी दुर्गावती एक गृहिणी थी. रामभवन के पड़ोसियों के मुताबिक़ दोनों मोहल्ले में लोगों से बहुत कम बात करते थे.
राम भवन के पड़ोस में रहने वाले शिवम त्रिपाठी ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, “राम भवन इस मोहल्ले में कई सालों से रह रहा था. उसका व्यवहार अच्छा था. ऑफ़िस कार से आता था और सीधे रूम की तरफ़ चला जाता था और रूम से सीधा ऑफ़िस जाता था. एक तरफा बैग टांगे कार से उतरता था, कहीं रुकता नहीं था. मैं इतना जानता था कि सरकारी जेई है. घर में राम भवन पत्नी और एक बच्चे के साथ रहता था. कार से एक दो बार बच्चों को आते-जाते देखा हूँ, लेकिन वो बच्चे बाहरी थे.”
बच्चों का यौन शोषण

सरकारी कर्मचारी होने के कारण आस-पड़ोस में राम भवन की छवि एक सज्जन व्यक्ति की थी. इसलिए कुछ बच्चों के माँ–बाप उसके पास अपने बच्चों को पढ़ने और कंप्यूटर सीखने के लिए भेजते थे.
वर्ष 2009 से 2012 तक जिस मकान में राम भवन रहता था, उसके मालिक का नाम राम आशरे गौतम था. तब राम आशरे छत्तीसगढ़ में रहते थे.
राम आशरे ने बीबीसी को बताया, “मैंने उसे सिंचाई विभाग के एक बाबू के माध्यम से कमरा दिया था. जब वह यहाँ रहता था, तब हम छत्तीसगढ़ में रहते थे. उससे हमारा साबका ज़्यादा नहीं था. जब हम आते तो उसका कमरा ज़्यादा समय बंद रहता.”
बाद में राम भवन सुदामा प्रसाद वर्मा के यहाँ किराए पर रहने लगा. सुदामा प्रसाद वर्मा पेशे से डॉक्टर हैं और उनकी पत्नी गीता वर्मा प्राइमरी में शिक्षक हैं.
दूसरे घर में भी मकान-मालिक दिन भर घर पर नहीं रहते थे. सुबह सुदामा प्रसाद अस्पताल चले जाते थे और पत्नी स्कूल पढ़ाने चली जाती थीं.
गीता वर्मा ने बीबीसी को बताया, “हम ज़्यादा समय घर पर नहीं रहते थे. वह गली से आता-जाता था. उसकी पत्नी से हमारा सामान्य रिश्ता था. उसके यहाँ मोहल्ले के बच्चे आते-जाते थे. हमारे साथ उसका कभी कोई विवाद नहीं हुआ था. हमें इस विषय में अब ज़्यादा बात नहीं करनी है.”
राम भवन पर आरोप था कि उसने अपने सगे-संबंधियों या अधिकांश ग़रीब और दलित परिवार के बच्चों का यौन शोषण किया.
सीबीआई के विशेष सरकारी वकील धारा सिंह मीणा ने बीबीसी को बताया, “राम भवन ने जिन नाबालिग़ बच्चों के साथ ग़लत काम किया, उनमें ज़्यादा संख्या दलित परिवार के बच्चों की है.”
उन्होंने आगे बताया, “राम भवन किराए का घर उसी लोकेशन पर लेता था, जहाँ मज़दूर परिवार ज़्यादा रहते थे. वह बच्चों को अपने घर तक अपनी मोटर साइकिल और कार से लेकर आता था.”
राम भवन को जानने वालों ने उसके बारे में क्या बताया?
राम भवन के गाँव वाले घर में सन्नाटा छाया हुआ है. उसके घर पर आने-जाने वालों को पड़ोसी सशंकित नज़रों से देखते हैं.
हमने जब परिवार के लोगों से बात करने की कोशिश की, तो महिलाओं ने बात करने से इनकार कर दिया.
वहीं पड़ोसियों ने बीबीसी को नाम न ज़ाहिर होने की शर्त बताया, “राम भवन यहाँ नहीं रहता है. वो यहाँ कभी-कभी आता था. वह नाबालिग़ बच्चों का यौन शोषण करता था, इसकी भनक पहले कभी नहीं लगी थी.”
गाँव में हमारी मुलाक़ात जनरल स्टोर की दुकान चलाने वाले कमल से हुई. कमल ने बताया, “मेरी उम्र 55 साल से अधिक हो गई है. आज तक राम भवन और उसका परिवार यहाँ कभी नहीं आया. हमने राम भवन को आज तक नहीं देखा है. जब अख़बार में ख़बर पढ़ी कि जिसे फांसी की सज़ा हुई है, वह हमारे गाँव का है तो हम सन्न रह गए.”
बीबीसी ने राम भवन का आपराधिक इतिहास तलाशने की कोशिश की, लेकिन कोतवाली में उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला.
राम भवन के बड़े भाई राजा भइया ने बीबीसी हिन्दी को बताया, “राम भवन हम भाइयों में सबसे छोटा है. उसने बांदा से पॉलिटेक्निक की पढ़ाई की है. शादी से पहले उसकी नौकरी लग गई. उससे पहले वो बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था. उसका आस-पड़ोस में कभी किसी से रिश्ता ख़राब नहीं था.”
उन्होंने यह भी बताया, “राम भवन बहुत कम बोलता था. उसका किसी से कोई विवाद नहीं था. उसके दोस्त बहुत कम थे. मुझे उसके दोस्तों के बारे में कोई जानकारी नहीं है. उसका कोई दोस्त यहाँ कभी नहीं आया.”
राम भवन के साथ 10 सालों तक काम करने वाले दीपक मौर्य ने बीबीसी को बताया, “उसका (राम भवन) व्यवहार नॉर्मल था. अपने काम से काम रखता था. पब्लिक से मिलता-जुलता नहीं था. आगे रहने वाला आदमी नहीं था. एक्टिव आदमी नहीं था. फ़्रेंडली बिल्कुल नहीं था. उसको न कभी हँसते देखा न ग़ुस्सा करते देखा. उसके व्यवहार से नहीं लगता था कि इतना घिनौना काम करेगा. उसके जीवन का वह दूसरा पहलू था.”
सिंचाई निर्माण खंड ऑफ़िस में कार्यरत एक व्यक्ति ने नाम न ज़ाहिर करने की शर्त पर बताया, “वह हँसता नहीं था. किसी से न मज़ाक करता था और न ही उसका किसी से विवाद होता था. आता था, काम करता था, चला जाता था. बोलता बहुत कम था. उदासीन टाइप आदमी था. किसी के यहाँ कार्यक्रम में आता-जाता नहीं था और न ही अपने घर में किसी को आमंत्रित करता था.”










