आर्काइव | वनतारा की बड़ी और विविध विदेशी, लुप्तप्राय जानवरों की आबादी में नब्बे से ज़्यादा अफ़्रीकी चीते हैं. इनमें एक दर्जन से ज़्यादा शावक हैं. 2024 में हिमाल की एक जांच में पाया गया कि वनतारा न केवल भारत और विदेश में निजी संस्थाओं से बल्कि गुजरात और असम में राज्य के स्वामित्व वाले चिड़ियाघरों से भी जानवर हासिल कर रहा है. कुछ राज्य चिड़ियाघरों ने जामनगर को विदेशी प्रजातियां भी भेजी हैं जो तस्करी कार्यों से जब्त किए जाने के बाद उन्हें दी गई थीं. इसके अलावा, विशेष रूप से महाराष्ट्र में राज्य वन विभागों ने खनन प्रभावित क्षेत्रों और मानव-पशु संघर्ष के स्थानों से वन्यजीव को निजी परिसर में भेजा है, बिना यह विचार किए कि दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक के निकट होने से पर्यावरण और वन्यजीव पर प्रभाव पड़ता है. हिमाल की जांच में पाया गया कि ‘वनतारा ने भारत भर में संरक्षण एनजीओ से पशु चिकित्सा और पशु-देखभाल कर्मचारियों को चुराया है.’
वनतारा के विस्तार को पिछले छह सालों में वन्यजीव के निजी स्वामित्व और व्यापार से संबंधित भारतीय कानूनों के कमज़ोर होने से मदद मिली है. मीडिया रिपोर्टों और विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि वनतारा निजी रिज़र्व स्थापित कर सकता है या यहां तक कि एक व्यावसायिक प्रजनन संचालन शुरू कर सकता है जहां कमजोर और लुप्तप्राय प्रजातियों को प्रजनन करके सरकारों और निजी ख़रीदारों को बेचा जाता है. हालांकि इसके बचाव संचालन, ग्रीन्स सेंटर ने प्रजनन फार्म बनाने की किसी योजना के होने से इनकार किया है. हालांकि मोदी के दौरे के एएनआई वीडियो में बहुत सारे युवा जानवर और शावकों की मेज़बानी करने वाला एक अत्याधुनिक नवजात देखभाल केंद्र दिखाया गया था..
जामनगर:
गुजरात के जामनगर में स्थित वनतारा देश के सबसे बड़े निजी वन्यजीव संरक्षण और पुनर्वास केंद्रों में से एक के रूप में सामने आया है। यहां बड़ी संख्या में विदेशी, दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजातियों के जानवरों की देखभाल की जाती है। हालांकि, इसके तेजी से विस्तार और जानवरों के अधिग्रहण को लेकर पिछले कुछ वर्षों में कई सवाल भी उठाए गए हैं।
2024 में प्रकाशित एक जांच रिपोर्ट में दावा किया गया था कि वनतारा को भारत और विदेश की निजी संस्थाओं के अलावा गुजरात और असम के सरकारी चिड़ियाघरों से भी जानवर मिले। रिपोर्ट में यह भी सवाल उठाया गया कि कुछ सरकारी संस्थानों ने तस्करी के मामलों में जब्त की गई विदेशी प्रजातियों को बाद में जामनगर भेजा।
जांच में महाराष्ट्र सहित कुछ राज्यों के वन विभागों द्वारा खनन प्रभावित क्षेत्रों और मानव-वन्यजीव संघर्ष वाले इलाकों से बचाए गए जानवरों को निजी परिसर में भेजे जाने पर भी सवाल उठाए गए। रिपोर्ट में यह मुद्दा भी उठाया गया कि जामनगर में दुनिया की बड़ी तेल रिफाइनरी परिसरों में से एक के निकट स्थित इस तरह के बड़े वन्यजीव केंद्र के पर्यावरणीय प्रभाव का पर्याप्त आकलन किया गया या नहीं।
रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया कि वनतारा ने देशभर के संरक्षण संगठनों से अनुभवी पशु चिकित्सा और पशु-देखभाल कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ा। इसे लेकर संरक्षण क्षेत्र में निजी संस्थानों और गैर-लाभकारी संगठनों के बीच विशेषज्ञ कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर बहस शुरू हुई।
निजी वन्यजीव संरक्षण को लेकर बहस
वनतारा के विस्तार ने भारत में निजी संस्थाओं द्वारा वन्यजीवों की देखभाल और प्रबंधन को लेकर व्यापक बहस को जन्म दिया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों और विशेषज्ञों ने आशंका जताई कि बड़े निजी वन्यजीव केंद्र भविष्य में निजी रिजर्व या व्यावसायिक प्रजनन केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं।
हालांकि, वनतारा के प्रबंधन ने व्यावसायिक प्रजनन फार्म स्थापित करने की किसी योजना से इनकार किया है। संस्था का कहना है कि उसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों को बचाना, उनका उपचार करना, पुनर्वास करना और संरक्षण में योगदान देना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वनतारा दौरे के दौरान जारी वीडियो और तस्वीरों में आधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाओं के साथ नवजात और युवा जानवरों की देखभाल के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी दिखाई गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट की जांच में क्या सामने आया?
वनतारा से जुड़े आरोपों की बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल (SIT) ने भी जांच की। जांच में जानवरों के अधिग्रहण, वन्यजीव कानूनों के अनुपालन, संभावित तस्करी, प्रजनन और संरक्षण से जुड़े आरोपों की समीक्षा की गई।
सितंबर 2025 में सामने आए निष्कर्षों में SIT ने वनतारा की ओर से कानून के उल्लंघन का सबूत नहीं पाया। सुप्रीम कोर्ट ने भी SIT की रिपोर्ट को स्वीकार कर संबंधित कार्यवाही समाप्त कर दी।
इस तरह वनतारा को लेकर विवाद को समझने के लिए शुरुआती जांचों में लगाए गए आरोपों के साथ-साथ बाद की आधिकारिक जांच और उसके निष्कर्षों को भी देखना जरूरी है।
वनतारा ने लगातार कहा है कि उसके पास मौजूद जानवरों का अधिग्रहण और स्थानांतरण लागू भारतीय कानूनों तथा अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप किया गया है और उसका उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण तथा पशु कल्याण है।
नोट: इस रिपोर्ट में पूर्व में प्रकाशित जांचों में उठाए गए आरोपों और बाद में हुई आधिकारिक जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग स्पष्ट किया गया है। पूर्व आरोपों को सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
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