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जौनपुर में अर्जक पद्धति से हुआ विवाह, नीरज-सुमन ने संविधान की शपथ लेकर शुरू किया नया जीवन

अर्जक विवाह पद्धति एवं संविधान की उद्देशिका की शपथ लेकर नीरज कुमार और सुमन यादव ने वैवाहिक जीवन की  शुरुआत।
बदलापुर,जौनपुर। स्थानीय तहसील क्षेत्र के ग्राम सभा मछली गांव में रविवार को  रामस्वरूप वर्मा द्वारा स्थापित अर्जक संघ की विवाह पद्धति से रामाश्चर्य नेता  विगत कई वर्षों से समाज में इस पद्धति से वैवाहिक कार्यक्रम को कराते चले आ रहें थे। यह प्रगतिशील और तर्कसंगत विवाह पद्धति है इसमें
वर और वधु लिखित शपथ-पत्र पढ़ते हैं। इसमें वे एक-दूसरे के प्रति समानता, सम्मान, निष्ठा और दांपत्य जीवन की प्रतिज्ञा करते हैं। यह मुख्य और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है ।

यह पद्धति सरल, कम खर्चीली और बिना किसी अंधविश्वास या कर्मकांड के होती है। शपथ पहले इसलिए होती है क्योंकि पूरी रस्म प्रतिज्ञा पर आधारित है, जयमाल  उसके बाद का प्रतीकात्मक कदम है।

अर्जक पद्धति में प्रतिज्ञापन मुख्य भाग है। यह सरल हिंदी में होता है ताकि सभी समझ सकें। वर और वधू इसे पढ़कर  एक-दूसरे के सामने शपथ लेते हैं, फिर हस्ताक्षर करते हैं।  नीरज कुमार अपने नाना डॉ मनराज शास्त्री के विचारों से प्रभावित होकर अर्जक विधि से विवाह करने का निर्णय लिया और अर्जक पद्धति से   प्रोफेसर लाल रत्नाकर ने वर और वधू को शपथ पत्र और संविधान की उद्देशिका पढ़ाकर विवाह सम्पन्न कराया।
वर की शपथ:
“मैं  नीरज कुमार पुत्र श्री राम केवल यादव सुश्री सुमन यादव पुत्री श्री अमर नाथ यादव को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करता हूँ। मैं उसके साथ समता (समानता) का व्यवहार करूँगा, पारिवारिक और दांपत्य जीवन में निष्ठा बनाए रखूँगा, वैवाहिक जीवन को मधुर और अविच्छिन्न बनाऊँगा तथा मानव-मानव की बराबरी वाले समाज के विकास और समृद्धि में सदैव योगदान दूँगा।”
वधू की शपथ:
“मैं सुमन यादव पुत्री श्री अमर नाथ यादव नीरज यादव पुत्र श्री राम केवल यादव को अपने पति के रूप में स्वीकार करती हूँ। मैं उसके साथ समता  का व्यवहार करूँगी, पारिवारिक और दांपत्य जीवन में निष्ठा बनाए रखूँगी, वैवाहिक जीवन को मधुर और अविच्छिन्न बनाऊँगी तथा मानव-मानव की बराबरी वाले समाज के विकास और समृद्धि में सदैव योगदान दूँगी।”
इसके बाद दोनों शपथ-पत्र पर हस्ताक्षर करते हैं। गवाह भी हस्ताक्षर करते हैं। अर्जक संघ की ओर से प्रमाण-पत्र दिया जाता है।
यह शपथ समानता, निष्ठा, मानवतावाद और तर्क पर आधारित है। इसमें कोई मंत्र, पूजा या कर्मकांड का प्राविधान नहीं होता है। इस दौरान उपस्थित प्रोफेसर राकेश कुमार यादव, डॉ संजय यादव, डॉ शिवशंकर यादव, एडवोकेट नृपेन्द्र विक्रम यादव एडवोकेट ब्रम्ह प्रकाश यादव ,वर और वधू पक्ष के साथ समाज के लोगों ने इस विवाह पद्धति की खूब प्रशंसा की और इस पद्धति को  अपनाने का निर्णय भी लिया। मुझे यह वेबसाइट के हिसाब से टाइटल और#बना कर दो

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