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नोएडा सेक्टर 62 में मजदूरों का फूटा गुस्सा, सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क जाम कर किया प्रदर्शन

नोएडा वेतन वृद्धि और बेहतर सुविधाओं की मांग को लेकर सैकड़ों मजदूरों ने किया हंगामा, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर संभाली स्थिति

नोएडा के सेक्टर 62 में मजदूरों ने सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचा, घंटों बाधित रहा यातायात।

नोएडा, उत्तर प्रदेश:
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और आईटी हब कहे जाने वाले नोएडा के सेक्टर 62 में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया जब बड़ी संख्या में मजदूरों ने सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। मजदूरों का गुस्सा इतना बढ़ गया कि उन्होंने मुख्य सड़क को जाम कर दिया, जिससे इलाके में लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि सेक्टर 62 स्थित कई निजी कंपनियों और फैक्ट्रियों में कार्यरत मजदूर लंबे समय से वेतन वृद्धि की मांग कर रहे थे। मजदूरों का आरोप है कि लगातार महंगाई बढ़ने के बावजूद उनकी सैलरी में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि उनसे काम पहले से ज्यादा लिया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने कंपनी प्रबंधन पर कई अन्य सुविधाएं न देने का भी आरोप लगाया।
सुबह से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन


प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक सोमवार सुबह बड़ी संख्या में मजदूर एकत्र हुए और नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते प्रदर्शन उग्र होता गया और मजदूरों ने सड़क के बीचों-बीच बैठकर रास्ता जाम कर दिया। इस दौरान “हमारा हक दो”, “सैलरी बढ़ाओ” और “शोषण बंद करो” जैसे नारे लगाए गए।
मजदूरों के सड़क जाम करने से सेक्टर 62 और आसपास के क्षेत्रों में यातायात बुरी तरह प्रभावित हो गया। ऑफिस जाने वाले कर्मचारियों, स्कूल बसों और अन्य वाहनों को घंटों जाम में फंसे रहना पड़ा।
मजदूरों की क्या हैं प्रमुख मांगें?
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि मौजूदा वेतन से घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। उन्होंने निम्नलिखित मांगें रखीं—
मासिक वेतन में तत्काल बढ़ोतरी
ओवरटाइम का उचित भुगतान
बोनस और अन्य भत्तों में वृद्धि
कार्यस्थल पर बेहतर सुरक्षा व्यवस्था
समय पर वेतन भुगतान की गारंटी
छुट्टियों और स्वास्थ्य सुविधाओं का प्रावधान
मजदूरों का कहना है कि कई बार प्रबंधन को ज्ञापन देने के बावजूद उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके बाद उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।
पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा

मुक़दमा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत दर्ज किया गया है (सांकेतिक तस्वीर)


घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पहले मजदूरों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब वे नहीं माने तो अधिकारियों ने कंपनी प्रबंधन और मजदूर प्रतिनिधियों के बीच बातचीत करवाई।
करीब दो घंटे की बातचीत और आश्वासन के बाद मजदूरों ने धीरे-धीरे प्रदर्शन समाप्त किया और सड़क से हटे, जिसके बाद यातायात सामान्य हो सका।
प्रबंधन का क्या कहना है?
कंपनी प्रबंधन की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार प्रबंधन ने मजदूरों की मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। बताया जा रहा है कि जल्द ही वेतन पुनरीक्षण को लेकर बैठक बुलाई जा सकती है।
स्थानीय लोगों को हुई परेशानी
इस प्रदर्शन और सड़क जाम से आसपास के दुकानदारों और स्थानीय निवासियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों ने कहा कि इस तरह अचानक सड़क जाम होने से जरूरी काम प्रभावित हुए और घंटों तक लोग फंसे रहे।
विशेषज्ञों की राय
श्रम मामलों के जानकारों का कहना है कि देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच मजदूरों की वेतन वृद्धि की मांग जायज है। यदि कंपनियां समय रहते कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं करतीं, तो इस तरह के विरोध प्रदर्शन बढ़ सकते हैं।
आगे क्या होगा?
फिलहाल प्रशासन ने मजदूरों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई कराई जाएगी। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो मजदूरों ने बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।
नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्र में इस तरह का विरोध प्रदर्शन प्रशासन और उद्योग जगत दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि इससे न केवल कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि औद्योगिक माहौल पर भी असर पड़ता है।

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