किसानों की आलू टमाटर बैंगन की फसल के लिए अभिशाप हो सकता है कोहरा।
पशुओं मुर्गियों बटेर पालन के लिए भी रहे सतर्क।
आलू सहित कई सब्जियों पर संकट ठंड से तितुर गई बाजारे।
कानपुर!
कानपुर सहित पूरे प्रदेश में पिछले 4 दिन से ठंडक ए कोहरा पढ़ना शुरू हुआ है जो कि आलू के साथ में टमाटर, बैंगन, सरसो, फली मटर मिर्च एवं मिर्च आदि फसलों को भी प्रभावित करेगा।
प्रमुख रूप से जब बहुत अधिक ठंड ठंड के साथ कोहरा पड़ता है तो आलू की फसल बहुत तेजी से प्रभावित होती है मौसम में परिवर्तन बहुत अधिक है तापक्रम निरंतर गिरता चला जाता है और सुबह बहुत अधिक ठंड के साथ कोहरा पड़ता है उसे आलू बैंगन एवं टमाटर की फसल पर झुलसा की समस्या तेजी से बढ़ेगी प्रमुख रूप से अगेती प्रजातियां मध्य तथा पछेती सभी प्रजातियों पर झुलसा का भीषण प्रकोप होता है। वातावरण का तापक्रम 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास होने से आलू की फसल पर झुलसा रोग की समस्या तीव्रता से बढ़ जाती है। कृषि विशेषज्ञ डॉ सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रमुख रूप से आलू की बुवाई समय पर हो गई थी अभी इस समय आलू निरोग है किसी भी प्रकार की कोई बीमारी आलू पर नहीं है पिछले दिन से जो मौसम में परिवर्तन हो रहा है वहां पर किसानों को सचेत रहने की आवश्यकता है किसानों को सलाह दी जाती है कि जिन किसानों ने आलू की सिंचाई नहीं की है निरंतर हल्की सिंचाई करते रहें और अपनी फसलों की निगरानी करते रहें यदि आलू की पत्तियों पर भूरे रंग के चिन्ह दिखाई दे और टिशु हल्की हो जाए पौधे की पत्तियां पानीदार दिखाई दे पत्तियों पर काले पानी से भरे हुए पैचेज दिखाई दे तो समझना चाहिए कि आलू का अगेती झुलसा का प्रकोप प्रारंभ हो गया है प्रमुख रूप से इस समय मौसम में अधिक नमी और कोहरा से इस प्रकार के लक्षण पौधों पर दिखाई देंगे। अधिक नमी से यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है इसके स्पोर बहुत प्रभावी होते हैं । पूरे खेत में बहुत तेजी से बीमारी फैल जाती है।
कृषि विशेषज्ञ डॉ सिंह ने बताया की प्रमुख रूप से इस बीमारी का अगर समय से पहचान कर ली जाए तो इसका प्रबंधन हो जाता है। प्रमुख रूप से मेटालैक्सिल 8% + मैकोंजेब 64% फफूदी नाशक की 3 ग्राम मात्रा को 1 लीटर पानी की दर से घोल बनाकर आलू की फसल पर छिड़काव करने से इस बीमारी से बचा जा सकता है छिड़काव बनाते समय मुख्य रूप से यह अवश्य ध्यान रखें कभी भी अधिक समय तक छिड़काव का घोल बनाकर ना रखें ताजा घोल बनाएं। फफूंदी नाशक सदैव रजिस्टर्ड दुकान से खरीदें और पक्का पर्चा प्राप्त कर लें। फफूदी नाशक के कंटेनर पर एक्सपायरी तिथि आवश्यक जांच लें।
बागवानी फसलों के लिए प्रमुख रूप से छोटे पौधों पर पुवाल से बने हुए छोटे छप्परो का प्रयोग करें, सूखे क्षेत्रों में सिंचाई करें, अधिक ठंड में पपीते में मिलीबग कीट की समस्या अधिक होती है फलों को कपड़ों से ढक कर रखें, साफ पानी से फसलों की सिंचाई करें, अधिक गहरी सिंचाई बिल्कुल ना करें, फसलों पर गंधक का छिड़काव करें जिससे वातावरण में तापक्रम नियंत्रित होगा और फसले नुकसान होने से बच जाएगी। पाले का असर भी काम होगा।
मवेशियों को गर्म पानी पिलाये, खाने में गुड़ और नमक की मात्रा बढ़ाएं, दुधारू पशुओं को गीला चारा बिल्कुल ना खिलाए, मवेशियों को टाट -बोरी से बांधकर ठंडक से बचाने के उपाय करें।
बकरियां मुर्गियों को बंद स्थान में रखें बटेर को खुले स्थान में बिल्कुल ना छोड़े। हल्का गुनगुना पानी मुर्गी पालन बटेर पालन के स्थानों पर रखें। नमी को अवशोषित करने के लिए धान की भूसी का प्रयोग करें। समय-समय पर बिछावन बदलते रहे। बीमारियों से ग्रसित चारे का प्रयोग खाने हेतु बिल्कुल ना करें।












