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ये मासूम सी बच्ची कहीं से लगती है नक्सली? लेकिन है? फ़िलहाल सरेंडर कर दिया है।

ये मासूम सी बच्ची कहीं से लगती है नक्सली? लेकिन है? फ़िलहाल सरेंडर कर दिया है। सवाल उठता है ऐसों को कौन मौत के मुँह में धकेल रहा है? बीते 2 हफ्तों में करीब 80 से ज्यादा नक्सलियों ने सरकार के अनुरोध पर आत्मसमर्पण किया है! सरकार इनके लिए सम्मान से जीने वाली ‘पुनर्वास योजना’ लेकर आई है, यानी सरेंडर करने वाले नक्सलियों को डेयरी,पोल्ट्री फार्म, टेलरिंग और खेतीबाड़ी के कामों में लगाया जाएगा। पहेल अच्छी है, छल-धोखा नहीं होना चाहिए?

सरेंडर कर चुके नक्सलियों के लिए सरकार ने सम्मान से जीने वाली पुनर्वास योजना बनाई है, जिसमें उन्हें डेयरी, पोल्ट्री फार्म, टेलरिंग और खेती-बाड़ी जैसे कामों में लगाया जाएगा। पिछले कुछ महीनों में छत्तीसगढ़ सहित कई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में करीब 80 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। छत्तीसगढ़ में नक्सल आत्मसमर्पण नीति-2025 लागू की गई है, जिसके तहत आत्मसमर्पण करने वालों को जमीन, आवास, और आर्थिक सहायता समेत पुनर्वास के अवसर दिए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करना है।

हालांकि, नक्सलियों के आत्मसमर्पण के बावजूद उनके परिवार और रिश्तेदारों को माओवादी संगठनों द्वारा निशाना बनाए जाने की संदिग्ध घटनाएं भी सामने आई हैं, जिसमें निर्दोष लोगों को भी नुकसान पहुंचाया गया है। इस कारण शांति स्थापित करने और पुनर्वास योजना को वास्तविक रूप में सफल बनाने के लिए सतर्कता जरूरी है ताकि छल-धोखा न हो और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति कायम हो सके।

सरकार को चाहिए कि आत्मसमर्पण करने वालों को सम्मान और स्थायी रोजगार मिले और उन्हें मौत के मुँह में धकेलने वाले कारणों की जड़ तलाश कर समस्याओं का स्थायी निदान किया जाए। यह पहल अच्छे संकेत हैं, लेकिन इसका सही क्रियान्वयन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित होना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि नक्सली आत्मसमर्पण पर भरोसा कायम रहे और वे मुख्यधारा में वापिस आ सकें ​.

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