By Nitesh
आजमगढ़ जिला कारागार में एक बड़ा घोटाला सामने आया है जिसमें जेल के वरिष्ठ अधीक्षक के सरकारी बैंक खाते से 17 महीनों में 52 लाख रुपये से अधिक की चोरी हुई है। इस धोखाधड़ी का मुख्य आरोपी दहेज हत्या के आरोपी बंदी रामजीत यादव है, जो जेल से रिहा होने के बाद फर्जी हस्ताक्षरों से जेल की चेकबुक का दुरुपयोग कर करीब 25 बार रुपये निकाल चुका है। उसने इस रकम का इस्तेमाल अपनी बहन की धूमधाम से शादी में किया है।

कहानी की शुरुआत 2011 से होती है, जब रामजीत यादव पर अपनी पत्नी की हत्या का आरोप लगा और सजा काटने के लिए आजमगढ़ कारागार में बंद हुआ। जेल में रहते हुए उसने दस्तावेजों की बारीकियां सीख लीं और 20 मई 2024 को जेल से रिहा होते समय जेल अधीक्षक आदित्य कुमार सिंह की चेकबुक चुरा ली। यह चेकबुक केनरा बैंक की कोतवाली शाखा के खाते से जुड़ी थी।
चेकबुक चोरी के बाद रामजीत यादव ने जेल के सरकारी खाते से फर्जी हस्ताक्षर कर 10 हजार रुपये से शुरुआत की, फिर धीरे-धीरे पैसे निकालते हुए लगभग 18 महीनों में 52 लाख रुपये से अधिक की निकासी की। वह शुरुआत में कम राशि निकाले लेकिन बाद में लाखों रुपये तक निकालने लगा। यह धोखाधड़ी तब पकड़ी गई जब जेल अधीक्षक के फोन पर पैसे निकाले जाने के मैसेज आने लगे। जब बैंक स्टेटमेंट निकाला गया तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

इस घोटाले में जेल के वरिष्ठ सहायक मुर्शिद अहमद, चौकीदार अवधेश कुमार पांडेय और बंदी शिवशंकर यादव की भी मिलीभगत सामने आई है। पुलिस ने चारों के खिलाफ तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कठोर कदम उठाने की बात कही है।
यह मामला जेल प्रशासन और बैंक दोनों की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही को उजागर करता है और सवाल उठाता है कि बंदी को कैसा सशक्त मौका मिला कि वह सरकारी खाते से इस तरह की ठगी कर सके।
इस दौरान अपराधी ने अपनी बहन की शादी धूमधाम से करी, महंगी बुलेट बाइक खरीदी और पुराने कर्ज भी चुकाए। पूरे मामले ने जेल सुरक्षा और सरकारी खजाने की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं। जांच अभी जारी है और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलाने की तैयारी चल रही है।

फोटो समेत विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध हैं जो इस घोटाले की पूरी कहानी और जांच की प्रगति को दर्शाती है।













