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आईआईटी में होंगे विकाश कार्य,11 करोड़ रुपये मील दान

आईआईटी

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर को पूर्व छात्रों की ओर से 11 करोड़ रुपये दान के रूप में दिए गए हैं। यह धनराशि संस्थान के विकास कार्यों के लिए दी गई है। संस्थान में 1986 बैच ने अपनी 40वीं वर्षगांठ मनाई। तीन दिवसीय आयोजन के दौरान पूर्व छात्रों ने कई पुरानी यादें भी ताजा की।

पूर्व छात्रों के पुनर्मिलन समारोह में विभिन्न देशों से भी छात्र संस्थान परिसर पहु्ंचे। पूर्व छात्रों की ओर से घोषित राशि को कैंपस में छात्र जीवन, मानसिक स्वास्थ्य और सामुदायिक सहभागिता से जुड़ी तीन बैच विरासत पहलों के लिए उपयोग किया जाएगा। इनमें एसएसी एक्सटेंशन ऑडिटोरियम, मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र व नए छात्रावास में एक टावर का निर्माण शामिल है।

इस दौरान पूर्व छात्रों ने कहा कि आईआईटी कानपुर और 1986 बैच के पूर्व छात्र ने कहा कि संस्थान ने हमारे व्यक्तित्व और जीवन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुझे अपने बैच के साथियों पर अत्यंत गर्व है कि वे ऐसी पहलों के समर्थन के लिए एकजुट हुए हैं, जो सीधे तौर पर छात्रों के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक कल्याण को प्रभावित करेंगी।

यह सामूहिक प्रतिबद्धता जिम्मेदारी और कृतज्ञता की उस भावना को दर्शाती है, जिसे संस्थान के पूर्व छात्र जीवनभर साथ रखते हैं। योगदान की सराहना करते हुए प्रो अमेय करकरे डीन, संसाधन एवं पूर्व छात्र, आईआईटी कानपुर ने कहा कि 1986 बैच ने पूर्व छात्र नेतृत्व और सामूहिक परोपकार का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। 11 करोड़ रुपये की उनकी उदार प्रतिबद्धता कैंपस में छात्र-केंद्रित बुनियादी ढांचे और कल्याण पहलों को महत्वपूर्ण रूप से सशक्त करेगी।

इस प्रकार के विरासत उपहार न केवल संस्थान के विकास को गति देते हैं, बल्कि संस्थान और उसके पूर्व छात्रों के बीच गहरे और स्थायी संबंधों को भी मजबूत करते हैं। हम 1986 बैच के दूरदर्शी दृष्टिकोण, उदारता और निरंतर जुड़ाव के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करते हैं।

बैच की ओर से अपनी बात रखते हुए अजीत दास, एलुमनाई बैच समन्वयक 1986 ने कहा कि जब हम अपनी 40वीं वर्षगांठ के लिए एकत्र हुए, तो सभी में यह साझा भावना थी कि हम संस्थान और उसके छात्रों के लिए स्थायी मूल्य सृजित करने वाला योगदान दें। ये विरासत परियोजनाएं हमारी सामूहिक कृतज्ञता और वर्तमान तथा भविष्य के छात्रों के जीवन में सार्थक योगदान देने की हमारी आकांक्षा को दर्शाती हैं।

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